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किस ओर चली गयी मानव प्रवृत्ति, सुखमय जीवन से विलासी निवृत्ति। किस ओर चली गयी मानव प्रवृत्ति, सुखमय जीवन से विलासी निवृत्ति।
माता पिता हमारे भगवन प्रातः उठ करें उन्हें नमन । माता पिता हमारे भगवन प्रातः उठ करें उन्हें नमन ।
प्यार का एहसास हो फिर हमें मिलता सुखद वो रास्ता !! हम बिना जाने सुने इस यंत्र से मित्रों की जमा... प्यार का एहसास हो फिर हमें मिलता सुखद वो रास्ता !! हम बिना जाने सुने इस यंत्...
" हम शहर हैं , हम गावों से निराले हैं , हमारी बातें ही कुछ और हैं , हम गाँव से बढ़कर हैं , हम उ... " हम शहर हैं , हम गावों से निराले हैं , हमारी बातें ही कुछ और हैं , हम गाँव ...
जब टूटते हैं पत्ता-पत्ता हो व्यथित बिखर उठते हैं। जब टूटते हैं पत्ता-पत्ता हो व्यथित बिखर उठते हैं।